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AI से बने फर्जी अश्लील वीडियो से युवक को ब्लैकमेल, पटना में 1.20 लाख की साइबर ठगी

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पटना के कंकड़बाग इलाके में AI तकनीक से फर्जी अश्लील वीडियो बनाकर एक युवक को ब्लैकमेल करने और 1.20 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पटना/आलम की खबर:पटना के कंकड़बाग इलाके में साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने तकनीक के दुरुपयोग और डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक युवक को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए फर्जी अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेल किया गया और धीरे-धीरे उससे 1.20 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। मामला सामने आने के बाद साइबर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी अब नई तकनीकों का इस्तेमाल कर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं।

घटना की शुरुआत एक अंजान वीडियो कॉल से हुई। पीड़ित युवक के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल कुछ ही सेकंड में कट गया, लेकिन यही वह शुरुआती कदम था जिससे पूरा साइबर जाल बिछाया गया। कुछ देर बाद युवक के व्हाट्सएप पर एक वीडियो भेजा गया, जिसमें उसे एक युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया था। यह वीडियो पूरी तरह फर्जी था और AI तकनीक की मदद से एडिट किया गया था, जिससे यह असली जैसा प्रतीत हो रहा था।

वीडियो देखने के बाद युवक घबरा गया। इसके तुरंत बाद उसे धमकी भरे संदेश मिलने लगे। आरोपियों ने कहा कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा और उसके परिचितों, परिवार और दोस्तों को भी भेजा जाएगा। बदनामी के डर से युवक मानसिक दबाव में आ गया और आरोपियों के जाल में फंसता चला गया।

शुरुआत में ठगों ने युवक से 10 हजार रुपये की मांग की और भरोसा दिलाया कि पैसे मिलते ही वीडियो डिलीट कर दिया जाएगा। युवक ने डर के कारण यह रकम भेज दी। इसके बाद आरोपियों ने नए-नए बहाने बनाकर फिर से पैसे मांगने शुरू कर दिए। धीरे-धीरे यह सिलसिला बढ़ता गया और अलग-अलग किस्तों में 15 हजार, 20 हजार और अन्य रकम वसूलते हुए कुल 1.20 लाख रुपये की ठगी कर ली गई।

लगातार पैसों की मांग और मानसिक दबाव से परेशान होकर पीड़ित युवक आखिरकार साइबर थाने पहुंचा और पूरी घटना की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामला गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज कर ली और जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की ट्रेसिंग कर रही है, जिनके जरिए यह ठगी की गई।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला बेहद संवेदनशील है क्योंकि इसमें AI तकनीक का गलत इस्तेमाल किया गया है। साइबर अपराधी अब एडवांस्ड एडिटिंग टूल्स और डीपफेक तकनीक की मदद से फर्जी वीडियो तैयार कर लोगों को फंसाने की रणनीति अपना रहे हैं। इस तरह के मामलों में पीड़ित अक्सर सामाजिक बदनामी के डर से तुरंत शिकायत नहीं करते, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के मामलों में जागरूकता बेहद जरूरी है। किसी भी अनजान वीडियो कॉल या संदिग्ध लिंक पर भरोसा नहीं करना चाहिए। साथ ही, इस तरह की धमकी मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को सूचित करना चाहिए, ताकि अपराधियों को समय रहते पकड़ा जा सके।

इस घटना ने पटना में साइबर सुरक्षा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। लगातार बढ़ रहे डिजिटल फ्रॉड और AI आधारित अपराध यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में ऐसे मामलों में और सतर्कता की आवश्यकता होगी।

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